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रुद्राभिषेक

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रुद्राभिषेक

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रुद्राभिषेक एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली वैदिक अनुष्ठान है, जो भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। यह पूजा विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास, या किसी विशेष इच्छापूर्ति हेतु की जाती है।

रुद्राभिषेक क्या है?

“रुद्र” भगवान शिव का एक रौद्र रूप है, और “अभिषेक” का अर्थ होता है स्नान कराना या किसी देवता के ऊपर पवित्र जल/द्रव्यों की धाराएं चढ़ाना। रुद्राभिषेक में शिवलिंग पर पवित्र जल, दूध, शहद, दही, घी, गंगाजल, और बेलपत्र आदि चढ़ाकर वैदिक मंत्रों जैसे ‘रुद्राष्टाध्यायी’, ‘श्री रुद्रम’, ‘चमकम्’ आदि का जाप किया जाता है।

रुद्राभिषेक क्यों किया जाता है?

1. शिव को प्रसन्न करने के लिए

भगवान शिव को अभिषेक प्रिय है, विशेषकर जल, दूध, और बेलपत्र से किया गया स्नान। रुद्राभिषेक से शिवजी बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामना पूरी करते हैं।

 

2. कष्टों और रोगों से मुक्ति के लिए

रुद्राभिषेक से मानसिक तनाव, रोग, और जीवन की बाधाएं शांत होती हैं। यह अनुष्ठान नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है और जीवन में शांति लाता है।

 

3. पापों का क्षय और शुद्धि हेतु

शास्त्रों में कहा गया है कि रुद्राभिषेक से पूर्व जन्मों के पाप भी नष्ट हो सकते हैं। यह आत्मा को शुद्ध करता है।

 

4. ग्रह दोष और कालसर्प दोष निवारण के लिए

रुद्राभिषेक विशेष रूप से राहु, केतु, शनि, या कालसर्प दोष से पीड़ित लोगों के लिए लाभकारी होता है।

 

5. पारिवारिक सुख और समृद्धि के लिए

इस पूजा से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है, कलह दूर होता है और पारिवारिक जीवन सुखमय बनता है।

 

6. मृत्यु भय और दुर्घटनाओं से रक्षा हेतु

रुद्राभिषेक के साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप व्यक्ति को अकाल मृत्यु और बड़ी आपदाओं से बचाता है।

शास्त्रों से प्रमाण:

  • शिव पुराण में कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धा से रुद्राभिषेक करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • यजुर्वेद के “श्री रुद्रम” और “चमकम्” में इस अनुष्ठान की महिमा का विस्तार से वर्णन है।

रुद्राभिषेक

रुद्राभिषेक का आरम्भ कैसे हुआ?

रुद्राभिषेक का आरम्भ वैदिक काल से माना जाता है, और इसका उल्लेख विशेष रूप से यजुर्वेद के “श्री रुद्रम” और “चमकम्” में मिलता है। यह एक प्राचीन वैदिक अनुष्ठान है, जो भगवान रुद्र (शिव) की उपासना हेतु स्थापित हुआ। इसका आरम्भ धार्मिक, दैवी और पौराणिक कारणों से हुआ है।

पौराणिक कथा अनुसार रुद्राभिषेक का आरम्भ:

1. भगवान शिव का तांडव और शांत करने का प्रसंग

एक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव ने सती के वियोग में तांडव किया और सृष्टि संकट में आ गई, तब देवताओं ने उन्हें शांत करने के लिए पवित्र जल और गंगाजल से अभिषेक किया। तभी से माना गया कि रुद्र को शांत करने का श्रेष्ठ उपाय है – अभिषेक।

2. रामायण कालीन प्रसंग

भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई से पहले रामेश्वरम् में शिवलिंग स्थापित कर रुद्राभिषेक किया था, जिससे उन्हें रावण पर विजय प्राप्त हुई। यह दर्शाता है कि यह परंपरा त्रेता युग से चली आ रही है।

3. महाभारत काल में अर्जुन का शिव आराधन

अर्जुन ने भी तपस्या के समय भगवान शिव की कृपा पाने हेतु अभिषेक और रुद्र जप किए थे। जिससे उन्हें पाशुपत अस्त्र प्राप्त हुआ।

वैदिक स्रोतों से प्रमाण

  • यजुर्वेद में “नमकं-चमकं” के रूप में रुद्राभिषेक मंत्रों का वर्णन है।

  • शिव पुराण, लिंग पुराण, और स्कंद पुराण में भी रुद्राभिषेक की विधि और महिमा विस्तार से बताई गई है।

निष्कर्ष:

रुद्राभिषेक का आरम्भ वैदिक काल में हुआ, और इसकी जड़ें हमारे धार्मिक ग्रंथों, पौराणिक कथाओं, तथा शिव की कृपा प्राप्ति से जुड़ी मान्यताओं में गहराई से जुड़ी हैं। यह केवल पूजा नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और भगवान से जुड़ने की दिव्य प्रक्रिया है।

रुद्राभिषेक

विशेष अवसरों पर रुद्राभिषेक और उसके विशेष लाभ:

अवसरलाभ
सोमवारशिव को विशेष प्रिय दिन – स्वास्थ्य और इच्छापूर्ति
सावन मासकई गुना फलदायक – विवाह, संतान, और धन लाभ
महाशिवरात्रिमोक्ष, आत्मिक जागरण
कालसर्प/पितृ दोष कालदोष निवारण में विशेष फलदायक

भगवान शिव के रुद्राभिषेक करने से अनेक आध्यात्मिक, मानसिक, पारिवारिक, और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। यह एक अत्यंत प्रभावशाली साधना है जो न केवल मनोकामनाओं की पूर्ति करती है, बल्कि जीवन की बाधाओं को भी शांत करती है।

रुद्राभिषेक के प्रमुख लाभ

1. मन की शांति और तनाव से मुक्ति

रुद्राभिषेक के समय बोला जाने वाला “ॐ नमः शिवाय” या “महामृत्युंजय मंत्र” मन को शांति देता है, और चिंता, क्रोध, या मानसिक तनाव दूर करता है।

2. धन और समृद्धि की प्राप्ति

इस अनुष्ठान से घर में वास्तु दोष, नकारात्मक ऊर्जा या आर्थिक समस्याएं समाप्त होती हैं और लक्ष्मी का वास होता है।

3. दोषों और बाधाओं का निवारण

रुद्राभिषेक से पितृ दोष, कालसर्प दोष, शनि दोष, और ग्रहदोषों का प्रभाव कम होता है।

4. स्वास्थ्य लाभ और रोग निवारण

विशेष रूप से दूध, शहद और औषधीय जल से किया गया अभिषेक रोगों से मुक्ति दिलाता है और जीवनशक्ति बढ़ाता है।

5. पारिवारिक सुख और गृह क्लेश से मुक्ति

जहाँ नियमित रुद्राभिषेक होता है, वहाँ सद्भाव, मेल-मिलाप, और शांति बनी रहती है।

6. शत्रु बाधा और भय से रक्षा

यह अनुष्ठान शत्रु बाधा, कानूनी मामलों, और दुर्घटनाओं से रक्षा करता है।

7. कर्मों का शुद्धिकरण और मोक्ष प्राप्ति

यह एक शक्तिशाली कर्मशुद्धि प्रक्रिया है जिससे पाप कर्मों का नाश होता है और आत्मिक उन्नति होती है।

8. ईश्वर से गहरा संबंध

रुद्राभिषेक भक्त और शिव के बीच आध्यात्मिक संबंध मजबूत करता है।

प्रमुख रुद्राभिषेक मंत्र

रुद्राभिषेक के दौरान बोले जाने वाले मंत्र अत्यंत शक्तिशाली होते हैं और भगवान शिव को प्रसन्न करते हैं। ये मंत्र शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, दही, घी आदि चढ़ाते समय बोले जाते हैं। इन मंत्रों से वातावरण शुद्ध होता है और साधक को मानसिक, आध्यात्मिक और भौतिक लाभ मिलते हैं।

1. ॐ नमः शिवाय

पंचाक्षरी मंत्र – भगवान शिव को अत्यंत प्रिय
उच्चारण:
ॐ नमः शिवाय
(प्रत्येक अभिषेक द्रव्य चढ़ाते समय जप करें)

 

3. रुद्राष्टाध्यायी / श्री रुद्रम मंत्र (यजुर्वेद से)

विशेष वैदिक रुद्राभिषेक में प्रयुक्त – पाप क्षय और शक्तिप्राप्ति हेतु
इसमें “नमकं” और “चमकं” का पाठ होता है। एक प्रसिद्ध अंश:

नमः शम्भवाय च मयोभवाय च।
नमः शङ्कराय च मयस्कराय च।
नमः शिवाय च शिवतराय च॥

2. महामृत्युंजय मंत्र

दीर्घायु, रोगमुक्ति, और अकाल मृत्यु से रक्षा हेतु
मंत्र:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

 

4. शिव पंचाक्षर स्तोत्र मंत्र (अभिषेक के साथ)

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै ‘न’ काराय नमः शिवाय॥

(हर पंक्ति में “ॐ नमः शिवाय” या “तस्मै [पंचाक्षर] काराय नमः शिवाय” जोड़ सकते हैं।)

रुद्राभिषेक करते समय मंत्रों के प्रयोग की विधि (संक्षेप में):

अभिषेक द्रव्यबोला जाने वाला मंत्र
जल“ॐ नमः शिवाय” या “गंगाच यमुने चैव…”
दूध“दुग्धं कल्पतरुस्तुल्यं…” या “ॐ सोमाय नमः”
दही“ॐ इशानाय नमः”
शहद“ॐ सद्योजाताय नमः”
घी“ॐ वामदेवाय नमः”
पंचामृत“ॐ अघोराय नमः”
बेलपत्र अर्पण“ॐ बिल्वपत्रं समर्पयामि”

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