शुभ दीपावली
दिवाली पूजा के लिए: मुहूर्त, अनुष्ठान और लाभ
दिवाली, जिसे दीपावली के नाम से भी जाना जाता है, भारत का सबसे प्रमुख और उल्लासपूर्ण त्योहार है। यह अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक है और आध्यात्मिक व आर्थिक उन्नति के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस लेख में हम जानेंगे दिवाली पूजा के मुहूर्त, अनुष्ठान और लाभ के बारे में, ताकि आप इस पर्व को पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से मना सकें।
दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त 2025
दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। शुभ मुहूर्त में की गई पूजा से माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
दिवाली तिथि: 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार)
लक्ष्मी पूजन मुहूर्त: सायं 06:01 PM से 08:15 PM तक (स्थानीय पंचांग अनुसार)
अमावस्या तिथि आरंभ: 20 अक्टूबर प्रातः 03:45 AM
अमावस्या तिथि समाप्त: 21 अक्टूबर प्रातः 02:50 AM
दिवाली पूजा विधि
पूजा की तैयारी
घर की साफ-सफाई और सजावट
मुख्य द्वार व पूजा स्थल पर रंगोली व दीप सजाना
माँ लक्ष्मी, गणेश जी की प्रतिमा
पूजा सामग्री: दीपक, मिठाई, फूल, रोली, अक्षत, कपूर, इत्र, पंचमेवा आदि
लक्ष्मी-गणेश पूजन
सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें।
फिर माँ लक्ष्मी का आवाहन करते हुए पूजन करें।
दीप जलाएं और लक्ष्मी स्तोत्र, कनकधारा स्तोत्र या श्रीसूक्त का पाठ करें।
धन, आभूषण और बही-खाते की पूजा करें (व्यवसायिक वर्ग के लिए)
अंत में घर के सभी स्थानों पर दीप प्रज्वलित करें।
दिवाली पूजा के लाभ
आध्यात्मिक व मानसिक लाभ
मन की शुद्धि और शांति प्राप्त होती है।
नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
आर्थिक व पारिवारिक लाभ
माँ लक्ष्मी की कृपा से धन-धान्य में वृद्धि होती है।
घर में समृद्धि, सुख और शांति बनी रहती है।
दिवाली पूजा से जुड़े विशेष उपाय
पूजा के समय घर में सात्विक वातावरण रखें।
दीपावली की रात में श्रीयंत्र की स्थापना कर उसका पूजन करें।
धन प्राप्ति के लिए ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जप करें।
निष्कर्ष: दिवाली पूजा क्यों है विशेष?
दिवाली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। सही विधि और मुहूर्त में की गई पूजा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है। इस दिवाली, आप भी इस पावन अनुष्ठान के माध्यम से माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करें और अपने जीवन को प्रकाशित करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिवाली पूजा किस देवी-देवता की होती है?
दिवाली पर मुख्य रूप से माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसके अलावा कुबेर देव, सरस्वती माता और दीपों की भी पूजा की परंपरा है।
दिवाली पूजा का सबसे शुभ समय क्या होता है?
दिवाली की रात प्रदोष काल और स्थिर लग्न (विशेष रूप से वृषभ लग्न) को पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
दिवाली पूजा में कौन-कौन सी सामग्री आवश्यक होती है?
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, दीया, धूप, कपूर, फूल, मिठाई, रोली, चावल (अक्षत), जल पात्र, सिक्के, बही-खाते, श्रीयंत्र, अगरबत्ती, घी, वस्त्र आदि।
क्या लक्ष्मी पूजा के बाद घर के सभी दीपक बुझा देने चाहिए?
नहीं, लक्ष्मी पूजन के बाद पूरी रात दीप जलते रहना शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और माँ लक्ष्मी का वास बना रहता है।
क्या दिवाली की पूजा में मंत्रोच्चारण ज़रूरी है?
हाँ, अगर संभव हो तो लक्ष्मी स्तोत्र, श्रीसूक्त, या “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है।
दिवाली पूजा में बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों की भागीदारी क्यों जरूरी है?
दिवाली पारिवारिक समर्पण और सामूहिक ऊर्जा का पर्व है। संपूर्ण परिवार के साथ मिलकर की गई पूजा से सौभाग्य, प्रेम और समृद्धि बढ़ती है।
दिवाली पूजा के बाद कौन से उपाय करें जिससे आर्थिक लाभ मिले?
दिवाली की रात श्रीयंत्र की पूजा करें, घर के प्रत्येक कोने में दीपक जलाएं और “ॐ श्रीं श्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” का 108 बार जाप करें। यह धनवृद्धि के लिए अति उत्तम माना गया है।
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