जन्मदिन पूजन
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जन्मदिन पूजन विधि
जन्मदिन पूजन एक विशेष धार्मिक विधि है जो व्यक्ति के जन्मदिन पर ईश्वर का आभार व्यक्त करने, आशीर्वाद प्राप्त करने और सुख-समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है। इसमें व्यक्ति के जन्म नक्षत्र, राशि और कुल परंपरा के अनुसार विविध पूजन विधियाँ की जा सकती हैं।
जन्मदिन पूजन का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व :
1. आयुष्यवृद्धि और आरोग्यता की कामना – जन्मदिन पर विशेष पूजा करने से भगवान से दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और मानसिक शांति की कामना की जाती है।
“आयुरारोग्यमैश्वर्यं देहि मे जगतां पते।”
2. कृतज्ञता का भाव – यह दिन ईश्वर को धन्यवाद देने का अवसर होता है कि उन्होंने एक और वर्ष सुरक्षित और सफलतापूर्वक बिताने का अवसर दिया।
3. कर्म शुद्धि और आत्मनिरीक्षण – पूजन के समय व्यक्ति अपने पिछले कर्मों का चिंतन करता है और आने वाले वर्ष में अच्छे कार्यों का संकल्प लेता है।
4. पारिवारिक और सामाजिक जुड़ाव – पूजा में परिवार के लोग मिलकर भाग लेते हैं, जिससे आपसी प्रेम और सामूहिक ऊर्जा का संचार होता है।
5. ज्योतिषीय दृष्टि से नक्षत्र शांति – इस दिन जन्म नक्षत्र की शांति के लिए भी पूजा की जाती है, जिससे आने वाले वर्ष में ग्रहों के दोष शांत होते हैं और शुभ फल मिलते हैं।
6. दान और पुण्य का अवसर – जन्मदिन पर दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और यह आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
- राशी और नक्षत्र आधारित मुहूर्त।
- आपके चयनित स्थान पर।
- आपके समय और सुविधा के अनुसार।
- किसी भी समय पंडित जी उपलब्ध हैं।
- सभी वैदिक मानक एवं प्रक्रियाएँ।
- प्रमाणित एवं अनुभवी पुजारी।
- संकल्प+पूजा+जाप+हवन+दान।
- एक ही छत के नीचे सभी समाधान।
जन्मदिन पूजन विधि :
1. शुद्धिकरण और संकल्प
स्वच्छ स्नान कर, पूजा स्थान को शुद्ध करें।
आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर बैठें।
हाथ में जल लेकर संकल्प लें:
“ॐ विष्णुं स्मरामि। मम जन्मदिने आयुरारोग्याभिवृद्ध्यर्थं इष्टदेवपूजनं करिष्ये।”
2. गणेश पूजन
भगवान गणेश का ध्यान करें:
“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”
उन्हें चावल, फूल, दीप-धूप अर्पित करें।
3. कलश स्थापना
कलश में जल भरकर आम के पत्ते रखें और ऊपर नारियल रखें।
कलश पर रोली, अक्षत लगाएँ और मंत्र बोलें:
“कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः।
मूले तत्र स्थितो ब्रह्मा मध्येमात्रे सरस्वती॥”
4. इष्टदेव पूजन
अपने इष्टदेव (जैसे विष्णु, शिव, दुर्गा आदि) का पूजन करें।
फूल, दीप, धूप, जल, अक्षत, नैवेद्य अर्पित करें।
मंत्र जाप करें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” (या अपने इष्टदेव का बीज मंत्र)
5. जन्म नक्षत्र पूजन (यदि ज्ञात हो)
- अपने जन्म नक्षत्र के देवता की विशेष पूजा करें (यदि जानकारी हो)।
6. आरती और मंत्र जाप
दीपक जलाकर आरती करें।
उदाहरण: “ॐ जय जगदीश हरे…”
इसके बाद यह आयु वृद्धि मंत्र जपें:
“ॐ आयुरारोग्यमैश्वर्यं देहि मे जगतां पते।”
7. ब्राह्मण पूजन / आशीर्वाद
यदि संभव हो तो ब्राह्मण को भोजन और दक्षिणा दें।
घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
8. हवन (वैकल्पिक)
- यदि संभव हो, तो “स्वाहा” के साथ निम्न मंत्र से छोटा हवन करें:
“ॐ नमः शिवाय स्वाहा”
“ॐ नारायणाय स्वाहा”
9. प्रसाद वितरण और दान
पूजन के बाद प्रसाद बाँटें।
किसी ज़रूरतमंद को अन्न, वस्त्र, या दक्षिणा का दान करें।
विशेष मंत्र (दैनिक उपयोग हेतु भी):
“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं आयुरारोग्यम् नमः।”
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे…” (महामृत्युंजय मंत्र)
पूजन सामग्री:
कलश, रोली, अक्षत (चावल), मौली (कलावा)
पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य (मिठाई या फल)
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
भगवान की मूर्ति या चित्र (विशेषतः इष्टदेव या बालकृष्ण)
श्रीफल, पीली वस्तुएँ (जैसे हल्दी, केले)
पवित्रीकरण जल (गंगाजल या शुद्ध जल)
जन्मदिन पूजन न केवल एक धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि यह आत्मिक उत्थान, ईश्वरीय आशीर्वाद, और मन की शांति प्राप्त करने का सशक्त माध्यम भी है।
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